भीष्म पितामह ने कृष्ण चरणों में त्यागे प्राण, बीसीसी कॉलोनी में उमड़ा जनसैलाब
छिंदवाड़ा। चंदन गांव स्थित बीसीसी कॉलोनी परिसर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। वृंदावन से पधारे अच्युत वात्सल्य सेवा संस्थान के प्रमुख, छोटे सरकार आचार्य श्री शुभम कृष्ण शास्त्री ने अपनी सुमधुर वाणी से भक्तों को भक्ति रस में सराबोर किया। अधिक मास के इस पावन अवसर पर संगीत मय कथा के दौरान पांडवों के प्रति भगवान कृष्ण के प्रेम और भीष्म पितामह के प्राण त्यागने के प्रसंग ने सभी की आंखें नम कर दीं।
मृत्यु और परमात्मा का अद्भुत मिलन
आचार्य श्री ने बताया कि पितामह भीष्म भगवान और मृत्यु, दोनों की प्रतीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भीष्म का चरित्र सिखाता है कि यदि जीवन में अंत समय में भगवान के दर्शन मिल जाएं, तो मृत्यु भी मोक्ष बन जाती है। जैसे ही शास्त्री जी ने “प्रभु से मेरा तार जोड़े ऐसा मुझे संत मिले…” भजन गाया, भक्त झूम उठे और नृत्य के माध्यम से अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।
परीक्षित जन्म और कलयुग का प्रभाव
कथा में राजा परीक्षित के जन्म और शुकदेव जी के आगमन का प्रसंग सुनाया गया। आचार्य जी ने स्पष्ट किया कि कलयुग के दोषों से बचने का एकमात्र साधन ‘हरि नाम’ और ‘गुरु की शरण’ है। साथ ही, कपिल देव और माता देवहूति के संवाद के माध्यम से सांख्य योग और भक्ति की महिमा बताई गई।
आज का विशेष आकर्षण: शिव विवाह की भव्य झांकी
कथा के तीसरे दिन आज सती चरित्र, ध्रुव चरित्र और शिव विवाह के प्रसंग सुनाए जाएंगे। इस अवसर पर भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की विशेष सजीव झांकी प्रस्तुत की जाएगी, जो भक्तों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र होगी। समिति ने अधिक से अधिक धर्मप्रेमियों को इस दिव्य आयोजन में सम्मिलित होने का आग्रह किया है।
