चैत्र नवरात्रि 2026: नूतन संवत्सर का प्रारंभ और शास्त्रोक्त कन्या पूजन की संपूर्ण विधि

झोतेश्वर/छिंदवाड़ा: परमहंसी गंगा आश्रम के आचार्य पंडित सोहन शास्त्री जी के अनुसार, वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि और हिंदू नव वर्ष (विक्रम संवत् 2083) का शुभारंभ 19 मार्च से होने जा रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार प्रतिपदा तिथि का क्षय होने के बावजूद धर्मसिंधु के नियमों के तहत 19 मार्च, गुरुवार को ही घटस्थापना और नूतन संवत्सर का पर्व मनाया जाएगा। इस विशेष अवसर पर ब्रह्म योग और मालव्य राजयोग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसमें सुबह 06:50 से 07:20 तक और दोपहर 12:20 से 01:20 तक (अभिजीत मुहूर्त) कलश स्थापना करना भक्तों के लिए अत्यंत मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला होगा।

पंडित सोहन शास्त्री जी ने माता के आगमन और प्रस्थान के संकेतों को स्पष्ट करते हुए बताया कि इस वर्ष माँ दुर्गा ‘पालकी’ पर सवार होकर पृथ्वी लोक पर पधारेंगी। गुरुवार से नवरात्रि प्रारंभ होने के कारण पालकी का आगमन प्राकृतिक बदलावों और स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने का संकेत देता है, वहीं माता का प्रस्थान ‘हाथी’ पर होगा, जो प्रचुर वर्षा, सुख-समृद्धि और कृषि में उन्नति का शुभ प्रतीक है। शास्त्री जी के अनुसार, नवरात्रि के इन नौ दिनों में अखंड ज्योत प्रज्वलित करने और माता के नौ स्वरूपों की विधिवत साधना करने से भक्तों के सभी कायिक और दैविक कष्ट दूर हो जाते हैं और घर में खुशहाली का वास होता है।

श्रीमद् देवी भागवत महापुराण का संदर्भ देते हुए आचार्य जी ने कन्या पूजन की विशेष विधि और महत्व पर प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया कि कन्या पूजन के लिए 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं का चयन श्रेष्ठ है, जिसमें 2 वर्ष की ‘कुमारी’ दरिद्रता का नाश करती है और 9 वर्ष की ‘दुर्गा’ शत्रुओं पर विजय दिलाती है। पूजन विधि के अंतर्गत सर्वप्रथम कन्याओं के पैर धोकर उन्हें आसन पर बिठाएं, फिर माथे पर कुमकुम तिलक लगाकर रक्षासूत्र बांधें और उन्हें पवित्र मन से तैयार हलवा-पूरी का भोजन कराएं। अंत में सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा और उपहार भेंट कर उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेना चाहिए, जिससे माता रानी की असीम कृपा प्राप्त होती है।