छिंदवाड़ा जिला ‘जल अभावग्रस्त’ घोषित, 15 जून तक निजी नलकूप खनन पर लगा पूर्ण प्रतिबंध

छिंदवाड़ा जिले में इस वर्ष अल्प वर्षा के कारण गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी ने “म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986” के तहत संपूर्ण जिले को ‘जल अभावग्रस्त क्षेत्र’ घोषित कर दिया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जो आगामी 15 जून 2026 तक प्रभावशील रहेगा। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य गर्मियों के दौरान आमजन के लिए पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना और भूमिगत जल स्रोतों को सुरक्षित रखना है।

जारी आदेश के अनुसार, जिले की समस्त राजस्व सीमा के भीतर किसी भी निजी भूमि पर नवीन नलकूप (बोरवेल) खनन कार्य को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। नियम के मुताबिक, किसी भी शासकीय पेयजल स्रोत से 150 मीटर की परिधि में नया उत्खनन करना कानूनी अपराध माना जाएगा। इसके अतिरिक्त, जिले की नदियों, नालों, स्टॉपडैम और जलाशयों से बिना सक्षम अनुमति के सिंचाई या अन्य व्यावसायिक कार्यों के लिए पानी का दोहन (पेयजल को छोड़कर) भी पूरी तरह वर्जित रहेगा।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति को निजी उपयोग हेतु नलकूप खनन की अत्यंत आवश्यकता है, तो उन्हें संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (SDM) को निर्धारित प्रारूप में आवेदन देकर अनुमति प्राप्त करनी होगी। आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा-188 और संशोधित अधिनियम 2002 की धारा-9 के तहत कठोर दण्डात्मक कार्यवाही की जाएगी। कलेक्टर ने सभी राजस्व अधिकारियों और थाना प्रभारियों को इस प्रतिबंध का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।