चातुर्मास्य व्रत कब से होगा शुरू: जानिए आज राहुकाल और राशिफल
छिंदवाड़ा | 02 जुलाई 2025
आज आषाढ़ शुक्ल सप्तमी के पावन दिन विशेष धार्मिक महत्त्व देखने को मिल रहा है। बुधवार के दिन बुधवारी अष्टमी व्रत का शुभ योग बना है, जो आज दोपहर 11:58 बजे से प्रारंभ होकर कल सूर्योदय तक प्रभावी रहेगा। इसके साथ ही उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र सुबह 11:07 तक और फिर हस्त नक्षत्र प्रभावी रहेगा। वरीयान योग के बाद परिघ योग संध्या 5:47 बजे से आरंभ होगा।
विशेष सावधानी:
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, सप्तमी तिथि को ताड़ का फल खाने से रोग और हानि की आशंका रहती है।
☀ चातुर्मास्य व्रत का संदेश:
आज से केवल चार दिन बाद 06 जुलाई से चातुर्मास्य व्रत प्रारंभ हो रहा है। शास्त्रों में वर्णित है कि चातुर्मास में ब्रह्मचर्य, उपवास, त्याग, दान और संयम का विशेष महत्त्व होता है।
पौराणिक मतानुसार —
<span;>> “एक हजार अश्वमेध यज्ञ के बराबर फल चातुर्मास्य व्रत से प्राप्त होता है।”
त्यागी भाव और तप ही इस व्रत का मूल है। नीले, काले, केसरिया रंग के वस्त्रों का त्याग और पत्तल पर भोजन, मौन व्रत आदि का पालन विशेष पुण्य प्रदान करता है।
जिनका आज जन्मदिन है:
उनका मूलांक 2 है, जो चंद्र ग्रह के अधीन होता है। ऐसे जातक कोमल हृदय, भावुक और कलात्मक होते हैं। आज जन्म लेने वाले जातकों को भविष्य में संयम और सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जाती है।
सभी राशियों का राशिफल संक्षेप में:
मेष: आर्थिक असंतुलन संभव, पर संयम से दिन ठीक रहेगा।
वृषभ: आलस्य से अवसर हाथ से जा सकते हैं, सावधानी रखें।
मिथुन: क्रोध और जल्दबाजी से हानि, स्वास्थ्य भी कमजोर।
कर्क: कार्यों में विलंब, धन व्यवहारों में उलझन बनी रहेगी।
सिंह: दूसरों पर दबाव बनाना उल्टा असर डालेगा।
कन्या: लापरवाही नुकसान दे सकती है, उधार से बचें।
तुला: मानसिक बेचैनी और घरेलू तनाव से जूझना पड़ सकता है।
वृश्चिक: अभिमान से कलह, पर कार्यक्षेत्र में आशाजनक स्थिति।
धनु: लाभ के योग परंतु स्वभाव में तल्खी हानि दे सकती है।
मकर: धार्मिक कार्यों में रुझान, पर स्वास्थ्य में गिरावट।
कुंभ: ऊर्जा की कमी, मानसिक असंतुलन का दिन।
मीन: जोखिम में लाभ के योग, पर पारिवारिक गर्माहट संभव।
राहुकाल — दोपहर 12:43 से 2:23 तक
दिशाशूल — उत्तर दिशा
सूर्योदय — सुबह 06:02
सूर्यास्त — शाम 07:23
स्रोत:
पद्म पुराण, स्कंद पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण एवं आर्य समय पंचांग संकलन से संकलित
नोट:
चातुर्मास में परनिंदा, प्रिय वस्तु का मोह, और तामसिक आहार से पूर्णतः बचें। ये चार महीने आत्मविकास और साधना के लिए सर्वोत्तम होते हैं।
