वह कहानी जिसमें शिवजी ने गणेश जी को देवता के विपदा दूर करने का वर दिया
वह कहानी जिसमें शिवजी ने गणेश जी को देवता के विपदा दूर करने का वर दिया 
पौराणिक कथा :- पौराणिक एवं प्रचलित श्री गणेश कथा के अनुसार एक बार देवता के ऊपर बहुत बड़ी विपदाओं आयी थी। तब सभी देवता मदद मांगने भगवान शिव के पास आए। उस समय शिवजी के साथ कार्तिकेय तथा गणेशजी भी बैठे थे। देवताओं की बात सुनकर शिव जी ने कार्तिकेय व गणेश जी से पूछा कि तुम में से कौन देवताओं के कष्टों का निवारण कर सकता है। तब भगवान कार्तिकेय व भगवान गणेश जी दोनों ने ही स्वयं को इस कार्य के लिए समर्थता दी। इस पर भगवान शिवजी ने दोनों की परीक्षा के साथ देवता के कार्य के लिए कहा कि तुम दोनों में से जो सबसे पहले पृथ्वी की परिक्रमा करके आएगा वही देवताओं की मदद करने जाएगा।
भगवान शिव की आज्ञा सुन कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठकर पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल गए, परंतु गणेश जी बुद्धि के देवता भी कहलाते है उन्होंने इस पर एक युति सूझी। गणेश जी अपने स्थान से उठें और अपने माता-पिता की सात बार परिक्रमा करके वापस बैठ गए। परिक्रमा करके लौटने पर कार्तिकेय स्वयं को विजेता बताने लग गए।इस पर शिव जी ने श्री गणेश से पृथ्वी की परिक्रमा ना करने का कारण पूछा। तब गणेश ने कहा – ‘माता-पिता के चरणों में ही समस्त लोक हैं।’ यह सुनकर भगवान शिव ने गणेश जी को विजय माना और गणेश जी को देवताओं के संकट दूर करने की आज्ञा दी। इस प्रकार भगवान शिव ने गणेश जी को आशीर्वाद स्वरूप कहा की पृथ्वी पर अनंत काल तक जो भी चतुर्थी के दिन जो तुम्हारा पूजन करेगा उसके घर सुख शांति समृद्धि की प्राप्ति होगी ।
