जबलपुर: नर्मदा में बड़ा हादसा, लाइफ जैकेट पहनने के बावजूद नहीं बच सकी मां-बेटे की जान

जबलपुर। संस्कारधानी के समीप पर्यटन स्थल पर एक दर्दनाक हादसे में दिल्ली से घूमने आए परिवार की खुशियाँ मातम में बदल गईं। रेस्क्यू टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद माँ मरीना मैसी और उनके चार वर्षीय बेटे त्रिशान के शव बरामद किए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि माँ ने लाइफ जैकेट पहनी हुई थी, फिर भी काल के क्रूर झोंके ने उन्हें जिंदगी की ढाल नहीं बनने दी।

ममता की आखिरी छटपटाहट

प्रत्यक्षदर्शियों और बचाव दल के अनुसार, यह दृश्य देख हर किसी की आँखें नम हो गईं। माँ ने डूबते समय अपने कलेजे के टुकड़े को सीने से इतनी मजबूती से चिपकाया था कि मौत भी उन्हें अलग नहीं कर सकी। जब दोनों के शव बाहर निकाले गए, तब भी बच्चा माँ की बाहों में जकड़ा हुआ था। इस हादसे में पिता प्रदीप मैसी और बेटी सिया किसी तरह अपनी जान बचाने में कामयाब रहे।

सवाल: सुरक्षा कवच (लाइफ जैकेट) क्यों रहा नाकाम?

विशेषज्ञों और रेस्क्यू टीम के अनुसार, लाइफ जैकेट पहनने के बाद भी जान जाने के पीछे कई तकनीकी कारण हो सकते हैं, जो इस हादसे में भी देखे गए:

अतिरिक्त भार और उत्प्लावन (Buoyancy): लाइफ जैकेट एक व्यक्ति के वजन को पानी की सतह पर रखने के लिए डिजाइन की जाती है। इस मामले में माँ ने बच्चे को कसकर पकड़ा हुआ था। दो लोगों का संयुक्त भार जैकेट की तैरने की क्षमता से अधिक हो गया होगा, जिससे जैकेट उन्हें सतह पर रखने में विफल रही।

कोल्ड वॉटर शॉक (Cold Water Shock): गहरे पानी में अचानक गिरने से शरीर ‘शॉक’ में चला जाता है। इससे हृदय गति रुक सकती है या व्यक्ति सांस लेने में असमर्थ हो जाता है, जिससे जैकेट पहने होने पर भी बचाव संभव नहीं हो पाता।

गलत फिटिंग: अक्सर पर्यटक लाइफ जैकेट को केवल ऊपर से पहन लेते हैं, लेकिन उसके ‘लेग स्ट्रैप्स’ और बेल्ट को सही से नहीं कसते। पानी के दबाव में जैकेट शरीर से ऊपर खिसक जाती है, जिससे व्यक्ति का चेहरा पानी में डूब जाता है।

भंवर और मलबे का फंसना: नर्मदा की लहरों में अक्सर तेज भंवर होते हैं। यदि व्यक्ति पानी के नीचे किसी पत्थर या मलबे में फंस जाए, तो लाइफ जैकेट का ऊपर की ओर लगने वाला बल भी उसे बाहर नहीं निकाल पाता।