शंकराचार्य सदानंद सरस्वती की हुंकार: ‘देश में रहकर देश को न मानने वालों के खिलाफ हिंदू एकजुट हों’
छिंदवाड़ा। द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज अल्प प्रवास पर छिंदवाड़ा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने समसामयिक धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी। शंकराचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब राजनीति धर्म के नियंत्रण से बाहर हो जाती है, तब समाज और व्यवस्था में प्रतिकूल परिस्थितियां निर्मित होती हैं।
अखाड़ा परिषद को कड़ा जवाब
योगी आदित्यनाथ और अविमुक्तेश्वरानंद जी के बीच चल रहे विवाद पर टिप्पणी करते हुए शंकराचार्य ने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी के बयान पर पलटवार किया। उन्होंने कहा, “दादागिरी क्या होती है? साधुओं का मूल कार्य सिद्धांतों का पालन करवाना है और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी वही कर रहे हैं। हम आचार्य और साधु समाज को सन्मार्ग पर चलाने के लिए हैं, न कि शक्ति प्रदर्शन के लिए।”
देशद्रोह और हिंदू एकता पर जोर
जबलपुर सहित अन्य शहरों में हालिया तनाव पर चिंता व्यक्त करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बहुत से लोग इसी देश में जन्म लेकर भी इसे अपना नहीं मानते। उन्होंने हिंदुओं से आह्वान किया कि वे एकजुट होकर विधर्मियों और राष्ट्रविरोधी तत्वों का ताकत के साथ मुकाबला करें।
गौ-रक्षा और कानून पर विचार
गौ-रक्षा के मुद्दे पर उन्होंने एक मुस्लिम विधायक द्वारा गौ-हत्या रोकने की अपील का स्वागत किया और उन्हें धन्यवाद का पात्र बताया। वहीं, केंद्र सरकार द्वारा लाए गए UGC एक्ट पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा कि इसमें केवल संशोधन की आवश्यकता नहीं है, बल्कि इसे पूरी तरह वापस लेना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि देश में सभी की रक्षा के लिए पहले से ही पर्याप्त कानून विद्यमान हैं।
