निजीकरण का दंश: सरकारी लैब निजी हाथों में जाते ही सुविधाएं ठप, जांच के लिए भटक रहे दूर-दराज के मरीज।
छिंदवाड़ा। सिम्स मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब इन दिनों अव्यवस्थाओं का केंद्र बनी हुई है। कहने को तो यहाँ 40 से अधिक प्रकार के टेस्ट की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन धरातल पर मरीजों को निराशा ही हाथ लग रही है। आसपास के जिलों से बड़ी उम्मीद लेकर पहुँचने वाले मरीजों को यहाँ पर्याप्त सुविधाएं न मिलने के कारण मजबूरन निजी लैब में भारी-भरकम राशि देकर जांच करानी पड़ रही है।
निजीकरण के बाद बंद हुई वैकल्पिक व्यवस्था
जानकारी के अनुसार, कुछ वर्षों पहले तक जिला अस्पताल में इमरजेंसी की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्थाएं मौजूद थीं, जिसके तहत निजी लैब (रोशनी लैब) से जांच कराई जाती थी। लेकिन जब से पैथोलॉजी लैब का संचालन निजी संस्थान ‘साइंस हाउस’ को सौंपा गया है, तब से यह वैकल्पिक व्यवस्था पूरी तरह बंद कर दी गई है। इसका सीधा खामियाजा उन गरीब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है जो दूर-दराज के इलाकों से अपना इलाज कराने यहाँ आते हैं।
मरीज की आपबीती
अपने पिता का इलाज कराने पहुंचे नीरज ने बताया कि वे सीबीसी, थायराइड और विटामिन B12 की जांच कराने आए थे। लेकिन लैब स्टाफ ने यह कहकर मना कर दिया कि केवल सीबीसी का टेस्ट ही संभव है, अन्य जांचें यहाँ नहीं हो पाएंगी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब अस्पताल में मशीनें और स्टाफ मौजूद है, तो मरीजों को सुविधाएं क्यों नहीं मिल पा रही हैं?
प्रबंधन का पक्ष
इस पूरे मामले में पैथोलॉजी लैब की प्रभारी डॉ. ममता आनदेव का कहना है कि शनिवार को मशीन में तकनीकी खराबी आने के कारण थायराइड के टेस्ट नहीं हो सके। उन्होंने आश्वासन दिया है कि सोमवार से मशीनों को ठीक कर टेस्टिंग की प्रक्रिया पुनः सुचारू रूप से शुरू कर दी जाएगी।
