छिंदवाड़ा में समाजसेवा की अनूठी मिसाल: पहली बार बड़े पर्दे पर फिल्म देख खिल उठे बच्चों के चेहरे
छिंदवाड़ा: अक्सर अभावों में पलने वाले बच्चों के सपने छोटी-छोटी खुशियों के लिए तरसते हैं, लेकिन जब समाज के जागरूक नागरिक और शिक्षक हाथ मिलाते हैं, तो ये सपने हकीकत बन जाते हैं। ऐसा ही कुछ नजारा छिंदवाड़ा के एक स्थानीय सिनेमाघर में देखने को मिला, जहाँ शासकीय माध्यमिक शाला ‘परतला’ के बच्चों के चेहरों पर एक अनूठी चमक दिखाई दी।
समाजसेवियों ने बढ़ाया हाथ
हाल ही में प्रदर्शित फिल्म ‘बच्चा गैंग’, जो पूर्णतः बच्चों के जीवन और उनके संघर्षों पर आधारित है, उसे दिखाने के लिए छिंदवाड़ा के समाजसेवियों ने सराहनीय पहल की। शासकीय स्कूल के इन बच्चों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे ₹130 की टिकट लेकर सिनेमा हॉल जा सकें। बच्चों की इसी लालसा और उत्साह को देखते हुए गांधीगंज के समाजसेवी हेमंत मक्कड़ और स्कूल के शिक्षक मनीष भट्ट ने योजना बनाई।
जब उन्होंने जिले के प्रतिष्ठित व्यक्ति इंद्रजीत सिंह बैस से बच्चों को सिनेमाघर तक लाने-ले जाने के लिए बस की व्यवस्था करने का निवेदन किया, तो उन्होंने बिना देर किए तुरंत बस उपलब्ध करा दी।
जीवन का पहला सिनेमाई अनुभव
बच्चों के लिए यह अनुभव किसी जादुई दुनिया से कम नहीं था। शाला के कई बच्चे ऐसे थे, जिन्होंने अपने जीवन में पहली बार सिनेमाघर के अंदर कदम रखा था। बड़े पर्दे की भव्यता, डॉल्बी साउंड और अंधेरे कमरे में तैरती रोशनी को देखकर वे दंग रह गए। उनके लिए यह केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि जीवन का एक यादगार अनुभव बन गया।
शिक्षाप्रद संदेश और अपील
शिक्षक मनीष भट्ट ने बताया कि फिल्म देखने के बाद जब बच्चों से चर्चा की गई, तो वे बहुत उत्साहित नजर आए। बच्चों ने फिल्म के पात्रों और कहानी की जमकर तारीफ की। उनका मानना है कि यह फिल्म न केवल बच्चों के लिए बल्कि पालकों के लिए भी उतनी ही जरूरी है।
लंबे समय बाद बच्चों के लिए एक ऐसी शिक्षाप्रद फिल्म आई है जो उन्हें जीवन के मूल्यों और संघर्षों से परिचित कराती है। शिक्षक भट्ट ने जिले के अन्य समाजसेवियों से भी अपील की है कि वे आगे आएं और शहर के अन्य गरीब तबके के बच्चों को भी यह मूवी दिखाएं, ताकि वे भी इस मनोरंजन और शिक्षा का हिस्सा बन सकें।
