SDRF का 24 घंटे का रेस्क्यू: भूस्खलन के खतरे के बीच 80 फीट गहरे कुएं से हाइड्रा मशीन से निकाला इकलौते बेटे का शव:डांट से था नाराज़
रविवार की सुबह न्यू बजरंग नगर में माँ की मामूली डांट से नाराज़ होकर 14 वर्षीय सार्थक वानखेड़े द्वारा 80 फीट गहरे कुएं में छलांग लगाने की हृदय विदारक घटना ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया है। SDRF की टीम ने लगभग 24 घंटे तक पानी और भूस्खलन के खतरे से जूझते हुए आज सोमवार सुबह 8 बजे बच्चे का शव बरामद किया। सार्थक 9वीं कक्षा का छात्र था और अपने दिवंगत पिता के बाद अपनी मां पूनम वानखेड़े का इकलौता सहारा था।
कुएं में कूदते ही मां ने लगाई चीख़, रेस्क्यू में 24 घंटे तक नहीं मिला सुराग
देहात थाना क्षेत्र के टीआई गोविंद राजपूत ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि रविवार सुबह लगभग 10 बजे सार्थक छत पर खेल रहा था। मां पूनम वानखेड़े द्वारा आवाज़ देकर नीचे बुलाने के दौरान, सार्थक ने आवेश में आकर छत पर बनी दीवार से सीधे कुएं में छलांग लगा दी। बेटे के कूदने की आवाज़ सुनते ही मां छत पर दौड़ीं और पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
सूचना मिलते ही पुलिस और SDRF टीम मौके पर पहुंची, लेकिन रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू से ही चुनौतियों से भरा रहा। कुएं की गहराई 80 फीट थी, जिसमें आधे से अधिक यानी 40 फीट तक पानी भरा हुआ था। 24 घंटे तक चली तलाश के बावजूद बच्चे का सुराग नहीं मिल पाया, जिसके कारण परिजन और स्थानीय लोगों की चिंता लगातार बढ़ती रही।
SDRF के सामने तीन बड़ी मुश्किलें: पानी, ठंड और भूस्खलन
SDRF प्रमुख गणेश धुर्वे ने बताया कि रेस्क्यू टीम के सामने तीन प्रमुख तकनीकी समस्याएं थीं। पहली, कुएं का पानी खाली करने के लिए तीन मोटरें लगाई गईं, लेकिन पानी का अच्छा आंतरिक स्रोत (‘झिर’) होने के कारण भराव लगातार बढ़ रहा था और पानी खाली होने में 8 से 10 घंटे का समय लगा। दूसरी, कुएं का निचला हिस्सा कच्चा था, जिससे भूस्खलन (भास्खलन) का गंभीर खतरा बना हुआ था। तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात, पानी बहुत ठंडा होने के कारण सार्थक का शव 24 घंटे बाद भी ऊपर नहीं उतराया था, जिससे टीम को नीचे जाकर ही शव को निकालने की रणनीति बनानी पड़ी।
भूस्खलन का खतरा टालने के लिए मंगवाई गई हाइड्रा मशीन
देर रात तक लाइट जलाकर रेस्क्यू जारी रहा, लेकिन खतरों के बीच टीम आगे नहीं बढ़ पाई। सोमवार सुबह 8 बजे, जब कुएं में केवल 5 फीट पानी बचा, तो भूस्खलन के खतरे को टालने के लिए एहतियातन एक हाइड्रा मशीन बुलाई गई। मशीन की मदद से एक प्लेटफॉर्म तैयार किया गया, जिसके सहारे SDRF के दो जांबाज़ जवानों को कुएं के अंदर उतारा गया। कड़ी मशक्कत के बाद, उन्होंने पेट के बल पड़े सार्थक के शव को सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस ने शव का पंचनामा कर जिला अस्पताल के मर्चुरी भेजा, जहां पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस इस मामले में सभी बिंदुओं पर गहराई से जांच कर रही है।
