CA संदीप साव का विश्लेषण: बजट 2026 – लोकलुभावन वादों से दूर, आर्थिक स्थिरता की ओर
केंद्रीय बजट 2026 तथा उससे संबद्ध वित्त विधेयक, 2026 यह स्पष्ट संकेत देता है कि सरकार की आर्थिक नीति अब कर दरों में बड़े बदलाव करने के बजाय कर प्रशासन को मज़बूत करने, अनुपालन बढ़ाने और कर कानूनों को अधिक स्पष्ट व पारदर्शी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यह बजट न तो अत्यधिक लोकलुभावन है और न ही करदाताओं पर अचानक बोझ डालने वाला, बल्कि यह अनुशासन और दीर्घकालिक स्थिरता पर आधारित है।
कर दरों में स्थिरता: आर्थिक योजना को भरोसा
इस बजट में आयकर स्लैब, कॉर्पोरेट टैक्स तथा स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर (4%) में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार करदाताओं और उद्योगों को नीति स्थिरता (Policy Stability) देना चाहती है।
बार-बार कर दरों में बदलाव से जहां असमंजस पैदा होता है, वहीं स्थिर कर ढांचा व्यवसायों और मध्यम वर्ग को अपनी वित्तीय योजना बेहतर ढंग से बनाने में मदद करता है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट के दृष्टिकोण से यह कदम स्वागतयोग्य है, क्योंकि कर योजना में सबसे महत्वपूर्ण तत्व पूर्वानुमेयता (Predictability) होता है।
नया आयकर अधिनियम, 2025: अब केवल भविष्य की बात नहीं
वित्त विधेयक, 2026 में पुराने आयकर अधिनियम, 1961 के साथ-साथ नए आयकर अधिनियम, 2025 में भी व्यापक संशोधन किए गए हैं। यह दर्शाता है कि सरकार नए कानून को धीरे-धीरे ज़मीनी स्तर पर लागू करने की तैयारी पूरी कर चुकी है।
अब करदाताओं, व्यवसायियों और कर पेशेवरों को अपने—
• लेखा तंत्र
• रिटर्न फाइलिंग की प्रक्रिया
• दस्तावेज़ीकरण और अनुपालन प्रणाली
को नए आयकर अधिनियम की भाषा और संरचना के अनुरूप ढालना होगा। आने वाले वर्षों में आकलन और अपील की कार्यवाही मुख्य रूप से इसी नए कानून के तहत संचालित होगी।
अनुपालन, दंड और कार्यवाही: लापरवाही की गुंजाइश कम
इस बजट में दंड, जुर्माना और अभियोजन से जुड़े प्रावधानों को अधिक सुव्यवस्थित और स्पष्ट किया गया है। आकलन, पुनःआकलन तथा समय-सीमा से संबंधित नियमों में भी स्पष्टता लाई गई है।
यह बजट करदाताओं को भयभीत करने वाला नहीं है, लेकिन यह साफ संदेश देता है कि—
• नोटिस की अनदेखी
• अधूरी जानकारी
• गलत या विलंबित रिटर्न
अब पहले की तुलना में अधिक जोखिम भरे हो सकते हैं। सरकार का उद्देश्य करदाताओं को दंडित करना नहीं, बल्कि समय पर और सही अनुपालन सुनिश्चित करना है।
विदेशी संपत्ति प्रकटीकरण योजना, 2026: अंतिम सुधार का अवसर
छोटे करदाताओं के लिए लाई गई विदेशी संपत्ति प्रकटीकरण योजना, 2026 इस बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अंतर्गत अघोषित विदेशी संपत्तियों या आय की स्वैच्छिक घोषणा पर सीमित कर भुगतान के साथ दंड और अभियोजन से राहत दी जाएगी।
पेशेवर दृष्टि से यह योजना उन करदाताओं के लिए अंतिम अवसर मानी जा सकती है, जिनके पास विदेशों में छोटे निवेश, बैंक खाते या अन्य संपत्तियाँ हैं और जिन्होंने अब तक उन्हें घोषित नहीं किया है। भविष्य में अंतरराष्ट्रीय सूचना साझाकरण के बढ़ते दायरे को देखते हुए यह कदम समझदारी भरा हो सकता है।
जीएसटी और कस्टम्स: सुधारात्मक कदम
अप्रत्यक्ष करों की बात करें तो जीएसटी और कस्टम्स में कोई बड़ा ढांचा परिवर्तन नहीं किया गया है। हालांकि—
• जीएसटी रिफंड प्रक्रिया
• मूल्यांकन और अपील व्यवस्था
• कस्टम ड्यूटी संरचना
में सुधारात्मक और स्पष्टता लाने वाले संशोधन किए गए हैं। ‘मेक इन इंडिया’ को समर्थन देने वाले कस्टम संशोधन घरेलू उद्योगों के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
बजट का मूल संदेश
कुल मिलाकर इस बजट का संदेश स्पष्ट है—
“कर छूट से अधिक ज़रूरी है कर अनुशासन और पारदर्शिता।”
सरकार चाहती है कि करदाता सही जानकारी दें, समय पर अनुपालन करें और कर प्रणाली को केवल औपचारिकता न समझें।
निष्कर्ष
चार्टर्ड अकाउंटेंट के दृष्टिकोण से केंद्रीय बजट 2026 अनुशासित करदाताओं के लिए अनुकूल, लेकिन लापरवाह रवैये के लिए सख़्त है। यह बजट कर प्रणाली को अधिक परिपक्व और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
वित्त वर्ष 2026-27 से कर अनुपालन केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण आर्थिक जिम्मेदारी बन चुका है ।
