वह काली रात जिसमें हजारों लोगों की कभी सुबह नहीं हुई भोपाल गैस त्रासदी
वह काली रात जिसमें हजारों लोगों की कभी सुबह नहीं हुई भोपाल गैस त्रासदी
ख़बर भोपाल : आज से 40 वर्ष पूर्व मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड प्लांट में 2 दिसंबर 1984 को आधी रात में मिथाइल आइसोनेट (एमआईसी) के रिसाव के कारण तत्काल 2660 निर्दोष लोगों की मौत हो गई वही इसके असर से सुप्रीम कोर्ट ने एक रिपोर्ट में इसका आकड़ा 15724 था वही कुछ सामाजिक कार्यकर्त्ता इसमें मरने वाले मौत का आकड़ा करीब 33000 से ज्यादा बताते है।इस प्लांट में बैटरी , कार्बन उत्पाद, वेल्डिंग उपकरण, प्लास्टिक , औद्योगिक रसायन, कीटनाशक बनाया जाता था जिसमे इस गैस का इस्तेमाल होता था इस जहरीली गैस रिसाव का दंश वह के रहने वाले हजारों लोगों ने वर्षो तक झेला और आज भी इस दंश के निशान दिखते है
हादसे का कारण 2 दिसंबर 1984 की रात को यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के कीटनाशक कारखाने से मिथाइल आइसोसाइनेट नामक रसायन लिक कर गया जिसने भोपाल शहर को एक विशाल गैस चैंबर में बदल दिया। और उस रात में जब यह गैस प्लांट से गैस रिसाव हुआ जिससे हजारों लोग सोये के सोये रह गए और जिसकी इस घटना के बाद जान भी बची उनको स्वास्थ्य कारणों से जीवन सामान्य नहीं हो पाया क्योंकि इस जहरीली गैस का असर लम्बे समय तक रहा यह भारत की पहली बड़ी औद्योगिक आपदा थी।
विडंबना यह थी कि इसका मुख्य आरोपी वॉरेन एंडरसन को कभी सजा नहीं हुई वह विदेश भाग गया था
भोपाल गैस त्रासदी से पीड़ित लोगों को सामाजिक न्याय नहीं मिला है। 40 साल बाद भी लोग न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
