महाकुंभ में स्नान के लिए इस बार ये तिथियां हैं सबसे खास, जानें स्नान से क्या मिलेगा पुण्य

महाकुंभ में स्नान के लिए इस बार ये तिथियां हैं सबसे खास, जानें स्नान से क्या मिलेगा पुण्य

उत्तर प्रदेश : प्रयागराज में अगले साल दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मेला यानी महाकुंभ शुरू होने जा रहा है।13 जनवरी से शुरू होने वाला यह महाकुंभ 25 फरवरी को शिवरात्रि पर संपन्न हो होगा इस मेले में करीब 40 से 45 करोड़ लोगों के शामिल होने का प्रारंभिक अनुमान है।यह संख्या इतनी ज्यादा है कि जितनी तो कुछ देशों की जनसंख्या भी नहीं होगी। प्रयागराज में 12 साल बाद होने जा रहे इस महाकुंभ को भव्य बनाने के लिए पीएम मोदी और यूपी की योगी सरकार कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं।स्वयं सीएम योगी हर हफ्ते प्रयागराज जाकर वहां के इंतजामों का निरीक्षण समय  समय पर कर रहे हैं।

मान्यता अनुसार महाकुंभ में संगम का स्नान करने से मनुष्यों को अक्षय गुणों की प्राप्ति होती है और उसके जीवन के सारे दुख-दर्द-पाप दूर हो जाते हैं।ज्योतिष शास्त्रियों के अनुसार, इस बार महाकुंभ 2025 में राजसी स्नान के अतिरिक्त इस बार दिव्य स्नान के लिए 10 प्रमुख तारीखें मिलने जा रही हैं।जिन पर स्नान करने से अनंत पुण्य लाभ हासिल होंगे और जीवन के उपरांत मोक्ष की प्राप्ति होती है।आइए जानते हैं कि इस बार कुंभ में स्नान की प्रमुख 10 तारीखें कौन सी हैं- 

1)पौष पूर्णिमा 13 जनवरी 2025 सोमवार

2)माघ कृष्ण एकादशी 25 जनवरी, 2025, शनिवार 

3)माघ कृष्ण त्रयोदशी 27 जनवरी, 2025 , सोमवार

4)माघ शुक्ल सप्तमी (रथ सप्तमी)-4 फरवरी, 2025 ई., मंगलवार 

5)माघ शुक्ल अष्टमी (भीष्माष्टमी) -5 फरवरी, 2025 ई., बुधवार

6)माघ शुक्ल एकादशी (जया एकादशी) -8 फरवरी, 2025 ई., शनिवार

7)माघ शुक्ल त्रयोदशी (सोम प्रदोष व्रत) – 10 फरवरी, 2025, सोमवार 

8)माघ पूर्णिमा, 12 फरवरी, 2025, बुधवार

9)फाल्गुन कृष्ण एकादशी, 24 फरवरी, 2025, सोमवार

महाकुंभ प्रथम राजसी स्नान

पौष पूर्णिमा, 13 जनवरी 2025, सोमवार

राजसी स्नान 

माघ कृष्ण प्रतिपदा मकर संक्रांति 14 जनवरी 2025, मंगलवार ।

राजसी स्नान

माघ (मौनी) अमावस्या -29 जनवरी, 2025 ई., बुधवार

राजसी स्नान

माघ शुक्ल पंचमी (बसंत पंचमी)-2 फरवरी, 2025 रविवार

राजसी स्नान

माघी पूर्णिमा, 12 फरवरी 2025, बुधवार

महाशिवरात्रि, 26 फरवरी, 2025, बुधवार

महाकुंभ कहा जाता है।कहते हैं कि महाकुंभ में पवित्र तिथियों पर स्नान करने से एक सहस्र अश्वमेघ यज्ञों को करने के बराबर पुण्य प्राप्त हो जाता है।