प्रकृति और प्रतिमा की पूजा का संगम है हमारा देश: आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज, मोक्ष कल्याणक के साथ महोत्सव का समापन
छिंदवाड़ा। जेल बगीचा स्थित अयोध्या नगरी में आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का सोमवार को ‘मोक्ष कल्याणक’ के साथ भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर चर्या शिरोमणि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत विभिन्न संस्कृतियों का देश है, जहाँ वैदिक संस्कृति प्रकृति की और श्रमण संस्कृति प्रतिमा की पूजा करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पूजा किसी की भी करें, लेकिन परस्पर वात्सल्य भाव होना अनिवार्य है, क्योंकि इसी से देश और संस्कृति का विकास संभव है।
भगवान आदिनाथ को हुआ मोक्ष
महोत्सव के अंतिम दिन सोमवार सुबह 6 बजे तीर्थंकर भगवान आदिनाथ स्वामी का मोक्ष कल्याणक मनाया गया। भगवान के कैलाश पर्वत से मोक्ष गमन करते ही भक्तों ने जयकारे लगाए और अग्निकुमार देवों ने आकर अंतिम क्रियाएं संपन्न कीं। इसके पश्चात दोपहर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई और प्रतिष्ठित प्रतिमाओं को नवनिर्मित जिनालय ‘अहिंसा हाइट’ में विराजमान किया गया।
आज छोटी बाजार में धर्मसभा और मंगल विहार
आचार्य संघ सोमवार शाम नागपुर रोड स्थित शांतिनाथ चैत्यालय पहुँचा, जहाँ समाधिस्थ मुनि श्री मृत्युंजय सागर जी महाराज के चरणों की स्थापना की गई। मंगलवार सुबह 7 बजे आचार्य श्री का मंगल विहार छोटी बाजार की ओर होगा, जहाँ रामलीला रंगमंच पर धर्मसभा के पश्चात संघ सिवनी की ओर प्रस्थान करेगा।
