नई गाड़ी लाओ, तभी बारात लाऊंगा!” छिंदवाड़ा में दुल्हन मंडप में बैठी रही, लेकिन दूल्हा भाग गया

ये कोई फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा का सच्चा और शर्मनाक मामला है।

9 मई को मंडप सजा था, रिश्तेदार मौजूद थे, स्टेज पर बैंड बज रहा था और दुल्हन शादी के लिए पूरी तरह तैयार थी। लेकिन बारात आई ही नहीं!
दूल्हा फोन पर बोला—”नई गाड़ी लेकर आओ, तभी बारात लेकर आऊंगा!”

शर्म की बात यह है कि ये सब 2025 में हो रहा है, जब हम चाँद पर बस्ती बसाने की बात कर रहे हैं। एक बेटी मंडप में घंटों इंतजार करती रही, उसकी आंखों में सपने थे और मन में उम्मीद। लेकिन वह सपना टूट गया, सिर्फ इसलिए क्योंकि दूल्हा और उसका परिवार दहेज की लालच में अंधे हो गए।

300 मेहमानों के सामने लड़की का परिवार अपमानित हुआ।
दुल्हन की मां-बाप की आंखों में आंसू थे, और समाज में एक बार फिर ये सवाल खड़ा हो गया—क्या दहेज के बिना आज भी कोई बेटी सुरक्षित शादी कर सकती है?

FIR दर्ज हो चुकी है, IPC की कई धाराएं और दहेज प्रतिषेध अधिनियम लागू किए जा सकते हैं। लेकिन सवाल ये है कि क्या सजा मिलने तक समाज जागेगा? या अगली बार फिर किसी मंडप में ऐसी ही चुप्पी छाई होगी?
अब चुप रहने का वक्त नहीं है। दहेज मांगने वालों को बेनकाब करो।शादी को सौदा बनने से रोकना होगा।
बेटियों को इंसाफ दिलाना होगा।

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