कर्म सुधारो, भगवान को परेशान मत करो: आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज का बड़ा संदेश, कल होगा मोक्ष कल्याणक
स्थानीय जेल बगीचा स्थित अयोध्या नगरी में आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव के चौथे दिन ‘ज्ञान कल्याणक’ के अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने मानवता और एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “कर्म प्रधान विश्व कर राखा, जो जस करही सो तस फल चाखा”, अर्थात मनुष्य जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल प्राप्त होता है। भगवान को परेशान करने के बजाय अपने कर्मों को सुधारना ही सच्ची भक्ति है।
एकता और अखंडता का आह्वान
आचार्य श्री ने भगवान श्री राम और सुग्रीव के पूर्व भव का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि कैसे दया भाव और नमोकार मंत्र ने एक जीव का कल्याण किया। उन्होंने समाज से अपील की कि जिस प्रकार इस पंडाल में सभी जीव एक साथ बैठकर धर्म सुन रहे हैं, वैसी ही एकता और अखंडता देश में बनी रहनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि नमोकार पढ़ने वाले सभी एक हैं और उन्हें सदैव एक ही रहना चाहिए।
मुनि आदिनाथ का प्रथम आहार और अक्षय तृतीया
महोत्सव के दौरान ‘तप कल्याणक’ की क्रियाएं संपन्न हुईं। मुनिराज आदिनाथ के छह माह के आत्मध्यान के बाद जब वे आहार के लिए निकले, तो एक वर्ष अड़तीस दिन बाद राजा सोम और राजा श्रेयांश के महल में उन्हें इक्षु रस (गन्ने का रस) का आहार प्राप्त हुआ। यही पावन दिन अक्षय तृतीया के रूप में अमर हुआ। इसके पश्चात कुबेर द्वारा रचित दिव्य समवशरण में भगवान विराजे और उनकी दिव्य वाणी खिरी, जिसे देवों और मनुष्यों ने साथ सुना।
कल होगा महोत्सव का समापन
महोत्सव के अंतिम दिन सोमवार को ‘मोक्ष कल्याणक’ मनाया जाएगा। अग्निकुमार देव अंतिम क्रियाएं संपन्न करेंगे और नवनिर्मित जिनालय में भगवान की प्रतिमाएं विराजमान की जाएंगी। आचार्य श्री द्वारा सूरीमंत्र प्रदान करने और भव्य शोभायात्रा के साथ इस पंचकल्याणक महोत्सव का समापन होगा।
गणमान्य नागरिकों ने लिया आशीर्वाद
रविवार को आयोजित धर्मसभा में प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष गंगाप्रसाद तिवारी, जिला कांग्रेस अध्यक्ष विश्वनाथ ओकटे, महापौर विक्रम अहके, निगम अध्यक्ष सोनू मागो, शटी बेदी सहित अनेक अतिथियों ने आचार्य श्री का आशीर्वाद लिया। महासभा के अध्यक्ष राजेंद्र पटोदी, अभय जैन व पंकज पाटनी ने अतिथियों का स्वागत किया।
