मतगणना: रामगढ़ में आगे निकली कांग्रेस, हरियाणा के जींद में कड़ी टक्कर

 
नई दिल्ली 

हरियाणा की जींद और राजस्थान की रामगढ़ विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे आज घोषित किए जा रहे हैं. दोनों सीटों पर वोटों की गिनती शुरू हो गई है. राजस्थान के रामगढ़ में जारी मतगणना में कांग्रेस पार्टी काफी आगे चल रही है. अभी तक यहां पर कांग्रेस पार्टी की साफिया खान को 6500 से अधिक वोट, बीजेपी के सुखवंत सिंह को 2300 से अधिक और बसपा के जगत सिंह को 434 वोट मिले हैं.
 
जींद में उपचुनाव हुए हैं जबकि राजस्थान के रामगढ़ में उम्मीदवार के निधन के कारण तब बाकी सीटों के साथ चुनाव नहीं हो सके थे. इसे लेकर पार्टियों ने जैसी तेजी दिखाई है और चुनाव प्रचार में जैसा शक्ति प्रदर्शन किया गया है, उससे साफ है कि पार्टियां और उसके नेता नतीजों को हल्के में नहीं लेंगे.

कांग्रेस ने जींद से अपने बड़े नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला को मैदान में उतारा है. महीने-दो महीने में लोकसभा चुनाव होने हैं, लिहाजा पार्टियां अपनी अपनी जीत को किला फतह से जोड़ेंगी और इसका सीधा संबंध दिल्ली के तख्त-ओ-ताज से जोड़ा जाएगा.  

बात सबसे पहले जींद की. यहां 28 जनवरी को उपचुनाव हुए. वोटिंग में उमड़ी भीड़ को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि विधानसभा में जब ऐसा जोश रहा, तो फिर लोकसभा में क्या होगा. सीट का ब्योरा देखें तो जींद निर्वाचन क्षेत्र में 1.7 लाख पंजीकृत वोटर हैं जिनमें से अनुसूचित जाति (एससी) और पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा है. जाटों का लगभग 25 प्रतिशत वोट है. फिलहाल इस सीट पर इंडियन लोकदल का कब्जा है.

हाल के महीनों में कांग्रेस ने जिस प्रकार से बीजेपी को अगड़ी जातियों, अमीरों, उद्योगपतियों से जोड़ा है और एससी, एसटी, ओबीसी को लुभाने की कोशिश की है, उससे स्पष्ट है कि कांग्रेस को जींद से काफी उम्मीदें हैं. तभी उसने अपने मीडिया प्रभारी और कैथल से विधायक रणदीप सुरजेवाला को जींद में उतारा है. हालांकि यह लड़ाई इतनी आसान नहीं है क्योंकि यह इनेलो की शर्तिया सीट रही है. फिर भी कांग्रेस बीजेपी की सत्ता विरोधी लहर में खुद की जीत और इनेलो की हार देख रही है. यह उपचुनाव इसलिए भी अहम है क्योंकि इस साल हरियाणा में विधानसभा चुनाव होंगे और जीत-हार का समीकरण जींद से सीधा जोड़कर देखा जाएगा.

कह सकते हैं यह उपचुनाव मैदान में उतरे सभी चार पार्टियों सत्तारूढ़ बीजेपी, कांग्रेस, इनेलो और नई बनी पार्टी जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के लिए एक अग्निपरीक्षा है. सुरजेवाला का दांव थोड़ा भारी लग रहा है क्योंकि उन्होंने पहले इनेलो सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला को हराया था. इन सारे फैक्टर के बावजूद जेजेपी को 'किंगमेकर' माना जा रहा है क्योंकि इनेलो और कांग्रेस को पता है कि जेजेपी उसके वोट काटेगी. इसका तकनीकी पहलू ये है कि आम आदमी पार्टी ने अपना कोई उम्मीदवार तो नहीं उतारा लेकिन जेजेपी को समर्थन दिया है. हरियाणा से सटे दिल्ली में आम आदमी पार्टी की छवि अच्छी है, इसलिए जानकारों के मुताबिक उसे अच्छे वोट मिल सकते हैं. यहां अच्छे वोट से संदर्भ बीजेपी, कांग्रेस और इनेलो के कटे वोटों से है. चुनाव प्रचार में अरविंद केजरीवाल भी गए थे और जेजेपी प्रत्याशी दिग्विजय चौटाला के लिए वोट मांगा था.

इनेलो के विधायक डॉक्टर हरिचंद मिढ्ढा के निधन के कारण यह उपचुनाव चुनाव हुआ है. मैदान में कुल 21 उम्मीदवार हैं लेकिन मुकाबला 4 प्रत्याशियों के बीच है. बीजेपी की ओर से कृष्ण मिढ्ढा प्रत्याशी हैं. उनके पिता हरिचंद मिढ्ढा यहां से विधायक थे.

अब बात राजस्थान में हुए रामगढ़ उपचुनाव की. इस सीट पर वोटिंग पहले 7 दिसंबर 2018 को होने वाली थी लेकिन ऐन चुनाव के पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के उम्मीदवार लक्ष्मण सिंह का निधन हो जाने के बाद इसे टालना पड़ा. चुनावी मैदान में 20 उम्मीदवार हैं लेकिन असली लड़ाई कांग्रेस की सफिया जुबैर खान, बीजेपी के सुखवंत सिंह और बसपा के जगत सिंह के बीच है. राजस्थान में किसान मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है और कांग्रेस ने हाल के विधानसभा चुनाव में कर्जमाफी कर उनका दिल जीता है, इसलिए उसका पलड़ा भारी दिखाई देता है. हालांकि उसका जाट फैक्टर कमजोर है. कांग्रेस के पास कोई जाट चेहरा ऐसा नहीं है जो अपने क्षेत्र असर रखता हो, जबकि राजस्थान में जाट मतदाता प्रभावी और मुखर है. रामगढ़ के नतीजे पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है.

कांग्रेस के साथ प्लस प्वाइंट यह है कि हाल में बीते विधानसभा चुनाव में उसे बंपर वोट मिले और बीजेपी की सरकार जाती रही. 199 सीटों में कांग्रेस को 99 मिले और उसकी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल को एक सीट. बीजेपी यहां 73 सीटों पर सिमट गई. 6 विधायक बसपा के और 13 निर्दलीय जीते. इन सभी विधायकों ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को समर्थन दिया है. यह समर्थन रामगढ़ के उपचुनाव पर असर डाल सकता है.

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